PDF का साइज़ कम करें (ऑनलाइन, फ्री)
Drop PDFs here
PDF — several at once
Your files never leave your browser
कैसे काम करता है
अपनी PDF चुनें
फाइल आपके ब्राउज़र में ही खुलती है, कहीं अपलोड नहीं होती।
सेटिंग तय करें
हर विकल्प नतीजे के साथ-साथ दिखता है, इसलिए बदलाव तुरंत समझ आता है।
डाउनलोड करें
कोई साइन-अप नहीं, कोई वॉटरमार्क नहीं, ईमेल की ज़रूरत नहीं।
सरकारी पोर्टल, एग्ज़ाम फॉर्म और ईमेल अटैचमेंट — हर जगह PDF का साइज़ एक सीमा से कम होना ज़रूरी होता है, और अक्सर फाइल आखिरी वक्त पर रिजेक्ट हो जाती है। यह टूल आपकी PDF को सीधे आपके ब्राउज़र में ही ऑप्टिमाइज़ करता है, यानी फाइल आपके डिवाइस से कहीं बाहर नहीं जाती — जो तब मायने रखता है जब डॉक्यूमेंट में आपकी निजी जानकारी हो। यह टेक्स्ट वाली PDF (रिपोर्ट, फॉर्म, इनवॉइस) पर अच्छा काम करता है। अगर आपकी PDF स्कैन की हुई है, तो उसका ज़्यादातर साइज़ अंदर मौजूद इमेज का होता है, जिसे ब्राउज़र में दोबारा एनकोड नहीं किया जा सकता — ऐसे में सबसे असरदार तरीका है दोबारा स्कैन करना, 600 DPI की जगह 200 DPI पर और कलर की जगह ग्रेस्केल में। इससे साइज़ कई गुना कम हो जाता है और टेक्स्ट पढ़ने लायक बना रहता है।
स्कैन की हुई PDF और टेक्स्ट PDF में फर्क
यह पहचानना सबसे ज़रूरी है कि आपकी फाइल किस तरह की है। कोई भी PDF रीडर में फाइल खोलिए और टेक्स्ट को माउस से सेलेक्ट करने की कोशिश कीजिए। अगर शब्द अलग-अलग हाइलाइट होते हैं, तो यह टेक्स्ट वाली PDF है — इसमें असली अक्षर सेव होते हैं और साइज़ का बड़ा हिस्सा स्ट्रक्चर का होता है, जिसे ऑप्टिमाइज़ करके काफी कम किया जा सकता है। अगर पूरा पेज एक ही ब्लॉक की तरह सेलेक्ट होता है या कुछ भी सेलेक्ट नहीं होता, तो यह स्कैन है — हर पेज दरअसल कागज़ की एक फोटो है। यह तीस सेकंड का टेस्ट बता देता है कि कम्प्रेशन से कितना फायदा होगा।
100KB या 200KB की लिमिट कैसे पूरी करें
ज़्यादातर सरकारी और एग्ज़ाम पोर्टल 100KB से 500KB के बीच लिमिट रखते हैं। टेक्स्ट वाली PDF आसानी से इस दायरे में आ जाती है। स्कैन वाली फाइल के लिए सबसे असरदार तरीका कम्प्रेशन नहीं, बल्कि दोबारा स्कैन करना है — 600 DPI कलर की जगह 200 DPI ग्रेस्केल चुनिए। ये दोनों सेटिंग अलग-अलग डेटा को करीब एक-चौथाई कर देती हैं, यानी मिलाकर फाइल कई गुना छोटी हो जाती है और छपा हुआ टेक्स्ट पूरी तरह पढ़ने लायक बना रहता है। अगर पोर्टल ने सिर्फ एक पेज माँगा है तो पूरी बुकलेट अपलोड करने के बजाय सिर्फ वही पेज अलग कर लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PDF compress kaise kare?
ऊपर दिए बॉक्स में अपनी PDF फाइल डालें या क्लिक करके चुनें। कुछ ही सेकंड में कम्प्रेस्ड फाइल डाउनलोड के लिए तैयार हो जाएगी — कोई साइनअप या लॉगिन ज़रूरी नहीं।
क्या मेरी फाइल कहीं अपलोड होती है?
नहीं। पूरा काम आपके ब्राउज़र में JavaScript से होता है, फाइल कभी भी किसी सर्वर पर नहीं जाती।
मेरी स्कैन की हुई PDF ज़्यादा छोटी क्यों नहीं हुई?
स्कैन की गई PDF में साइज़ मुख्य रूप से पेज इमेज का होता है। ब्राउज़र-आधारित टूल इन इमेज को दोबारा कम्प्रेस नहीं कर सकता। बेहतर तरीका है कि डॉक्यूमेंट को 200 DPI ग्रेस्केल में दोबारा स्कैन करें।
क्या क्वालिटी खराब होगी?
टेक्स्ट और वेक्टर कंटेंट बिल्कुल वैसा ही रहता है। यह टूल इमेज को दोबारा एनकोड नहीं करता, इसलिए दिखने में क्वालिटी का नुकसान नहीं होता।
क्या कम्प्रेस करने से PDF की क्वालिटी खराब होगी?
टेक्स्ट वाली PDF में बिल्कुल नहीं। PDF में टेक्स्ट अक्षरों के रूप में सेव होता है, इसलिए फाइल साइज़ चाहे जो हो, प्रिंट और स्क्रीन पर क्वालिटी वही रहती है। सिर्फ अंदर मौजूद इमेज की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है।
कम्प्रेस करने के बाद भी फाइल लिमिट से बड़ी है, अब क्या करें?
पहले देखिए कि फाइल लिमिट से कितनी बड़ी है। थोड़ी सी ज़्यादा है तो खाली पेज हटा दीजिए। दो-तीन गुना ज़्यादा है तो ग्रेस्केल में दोबारा स्कैन कीजिए। दस गुना ज़्यादा है तो कम्प्रेशन से कुछ नहीं होगा — डॉक्यूमेंट दोबारा बनाना ही पड़ेगा।